एआई का उपयोग-प्रभाव और दुष्प्रभाव
आज एआई हमारे दैनिक जीवन से लगभग जुड़ता जा रहा है ,द्रुतगामी रूप से जानकारी प्राप्त करने में जैसे गूगल एआई,चैट जीपीटी, व अन्य । यह सुविधाएं हमारे समय को बचाती हैं ।इसके साथ ही यह भी कहीं न कहीं संदेह रहता ही है कि इसकी प्रमाणिकता कितनी है ।
इसी प्रकार स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो जहाँ पूर्व में लोगों को अपने रोगों का पता भी नहीं चलता था और जीवन लीला समाप्त हो जाती थी ,कभी-कभी तो पूरा का पूरा गांव तक किसी संक्रामक बीमारी की स्पष्ट जानकारी न मिलने पर समाप्त हो जाता था,किन्तु धीरे-धीरे वैज्ञानिक खोजों ,जानकारियों के प्रसारण की बेहतर सुविधाओं के कारण अब लगभग बीमारी ,रोगों व अन्य के साथ ही शरीर के आंतरिक भागों में चल रहे परिवर्तनों को एआई और अन्य मशीनों से पूरी जानकारी समय पूर्व मिल जाने से रोग का उपचार किया जाना संभव हो पाया है ।
मार्केटिंग के क्षेत्र में भी इसी प्रकार किसी तरह के सामानों की उपलब्धता का पता आप विभिन्न प्रकार के अपने चुनाव के अनुसार कर सकते है, इसमें आप एआई की मदद ले सकते है जिससे वह आपको कई सारे विकल्प दिखाता है ,अपने बजट के अनुसार यह आपको चीजें प्राप्त करने में मदद कर पाता है , इसी से कुछ जुड़ा है आपका व्यवसाय जिसे आप विभिन्न तरीकों से बढ़ाने में सहायता के लिए उपयोग करके ग्राहकों तक अपनी पहुँच को सुगम बना कर सकते है ,चूंकि अब बड़े-बड़े शहरों से लेकर कस्बों तक लोग जानकारी लेने के लिए सबसे पहले अपने फ़ोन का ही इस्तेमाल करते है उसमें उन्हें कुछ जानकारी लेनी है या खोजबीन करनी है तो जस्टडायल,गूगल क्रोम व अन्य का इस्तेमाल कर रहे है,इससे ग्राहक के साथ -साथ उद्योगों का भी विकास हो रहा है ।
यात्राओं में परिवहन की सुविधाएं, बस ,रेलवे,हवाई यात्राओं की टिकट ,मौसम विभाग की जानकारियां, व अन्य सुविधाएं आज एआई के माध्यम से मिल जाती है,किसी भी जगह की खोज में गूगल मैप, नेविगेशन प्रणाली कहीं न कहीं मानव जीवन को सरल और सहज बना रहा है । आज शिक्षा के स्तर पर भी काफी सुधार हुए है आप घर बैठे अपनी पढ़ाई को पूरी कर सकते है अपनी कक्षाएं ऑनलाइन ले सकते है ,कोविड महामारी में सबसे अधिक इन सॉफ्टवेयर की उपयोगिता को हमनें समझा जैसे कि स्विगी, जोमैटो, इंस्टामार्ट, गूगल मीट पर ऑनलाइन मीटिंग,वेक्सीन की उपलब्धता व जानकारी व अन्य।
वैज्ञानिक खोजों ,खगोलीय खोजों व अन्य में बहुत ही मददगार साबित हो रही है एआई । इसके साथ ही रोबोटिक्स ने रोबोट या कहें कि मानव मशीन का निर्माण किया है जो हाल ही में अस्पतालों ,वैज्ञानिक शोध संस्थानों ,रेस्टोरेंट में मानव की जगह सहायक के रूप में स्थापित करने में प्रयोग किया है ।इसी प्रकार स्वचालित गाड़ियों,मशीनों,दैनिक जीवन की आवश्यकताओं में कुछ न कुछ चीजें हमारे आस -पास इस्तेमाल में लायी ही जा रही है जो मानव जीवन में सुविधाओं के साथ जीवन को आसान बना रही है । मौसम के साथ ही जलवायु परिवर्तन, आपदा-प्रबंधन में भी पूर्व जानकारी होने से कई हादसों को रोकने के प्रयत्न या जान-माल की कम हानि होने से बचाया जा रहा है । कृषि यंत्रों ,ई-नाम , ई -कृषि बाजार प्रणालियों और खेती के तरीकों की जानकारी में लगातार इस्तेमाल से कृषि उपज में वृद्धि और कृषि खोजों आदि में बेहतरीन विकास हो रहा है।
ध्यातव्य यह भी है कि मानव निर्मित यह बुद्धिमत्ता जितनी सुविधाजनक और उपयोगी बनती जा रही है उसी प्रकार मनुष्य धीरे -धीरे अपनी ही बनायी बुद्धि के गिरफ्त में भी होते जा रहा है ,जैसा कि कहा भी गया है अति का कुछ भी अच्छा नहीं होता है ,आज मानव की निर्भरता अपने छोटे-छोटे काम की भी इन्हीं मशीनों पर बढ़ती जा रही है और इस आभासी से संसार की प्रामाणिकता या विश्वास कितना किया जा सकता है इसकी कोई भी स्पष्ट जानकारी नहीं प्राप्त है ,अभी हाल ही कि घटना से मैं परिचय करवाऊँ तो गूगल मैप पर पूर्ण भरोसे की वजह से एक अधूरे पुल पर लगातार 3 हादसें हुए है।ऐसे ही आज हम सुरक्षा की दृष्टि से भी विभिन्न प्रकार से एआई का इस्तेमाल करते है ट्रैकिंग डिवाइसेज ,सर्विलांस व अन्य सुविधाएं जिससे जीवन आसान हुआ है किंतु इसकी जानकारी के अभाव या पूर्ण जानकारी न होने के कारण बहुत से हादसे जो रोके जा सकते थे समय पर नहीं रोका जा सका , लेकिन जहाँ एक तरफ इसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे है उसी तरह इसके दुष्परिणाम या दुष्प्रभाव भी पड़ रहे है ,लोगों की इन सुविधाओं पर बढ़ती निर्भरता सबसे पहले उनके स्वास्थ्य, निजता के हनन ,अकर्मण्यता ,बढ़ती बेरोजगारी क्योंकि एआई के द्वारा मानव की जगह मशीनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है ,मानसिक विकृति व अन्य पर प्रभाव पड़ रहा है ।
एआई का इस्तेमाल जहाँ एक तरह बेहतरी प्रदान कर रहा है वही दूसरी ओर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा है मानसिक तनाव,एकाकीपन,कहीं न कहीं अब हर व्यक्ति अपने आपका व्यक्ति बनते जा रहा है ,लगातार बीतते वर्षो में आत्महत्या, मानसिक रोगों ,हत्या व अन्य के मामलें बढ़ते जा रहे है ।लोगों की सुरक्षा के साथ ही निजता का हनन बढ़ते जा रहा है ,हाल ही में डीप फेक के मामले सामने आए है ,एआई की मदद से किसी को भी किसी भी दृश्य में डाल कर सोशल मीडिया में पोस्ट कर दिया जा रहा है ,किसी की भी आवाज का इस्तेमाल कर ठगी ,बेईमानी,साइबर अपराध ,साइबर लूट को संचालित किया जा रहा है ,ऐसा मालूम होता है कि हर वक्त आप पर नजर रखी जा रही है ,खाशकर आपके फ़ोन पर डाली गई आपकी जानकारियों से ,आप गौर करें तो पाएंगे की आपकी रुचि के अनुसार ,आपकी मनः स्थिति के अनुसार की आपके सामने कंटेंट आ रहे है । यह भी एक तरह की डिजिटल निगरानी ही है ।आज हमारे बैंक एकाउंट व अन्य सभी महत्वपूर्ण डेटा इस आभासी दुनियां में विचरण कर रहे है । आज हमारे पास एआई की सुविधाएं जहाँ हमें अभिव्यक्ति के तमाम मौके दे रही है ,अपनी तरह का एक आभासी समाज की रचना करने में मदद दे रही है वहीं इसकी निर्भरता या अनुपस्थिति होने पर हममें मानसिक दुष्प्रभाव भी बढ़ते जा रहा है ,धैर्य कम होते जा रहा है।
हालांकि एआई हमारा विश्व के लोग और लोगों को समझने में काफी मददगार भी साबित हो रहा है क्योंकि एआई के माध्यम से हम उनकी ,भाषा ,संस्कृति आदि को समझकर बेहतरीन तरीके से संवाद कर सकते है ।
एआई को प्रेषित कोई भी जानकारी वह दिशानिर्देश के अनुसार वह हमे श्रेणीबद्ध करने ,सूचित करने में प्रयुक्त कर रहा है जिससे जीवन के किसी भी पड़ाव में जब आप युवा है या शारिरिक रूप से अक्षम है तब भी आपको एक अलार्म की तरह सचेत करने में भी मददगार साबित हो सकता है जैसे कि घरेलू रोबोट्स ,एलेक्सा व अन्य ।
समालोचनात्मक परिपेक्ष्य में देखे तो एआई भविष्य के लिए एक आधुनिक दुनियां में एक समुदाय की तरह कई तरह से हमारी मदद कर सकता है जिससे समावेशी विकास विभिन्न क्षेत्रों में देखा जा सकता है ,इसी के साथ ही इस पर निर्भरता या सचेत होकर काम न करना कई तरह से हमें हानि भी पहुँचा सकता है ,मेरा अपना विचार है कि जिस तकनीक को इंसान ने बनाया है कहीं वही उसके गिरफ्त में जकड़ा न जाये इसलिए पूरी चेतना के साथ इसका उपयोग और उपभोग किया जाना चाहिए।