Sunday, December 18, 2022

भावनायें





मैंने देखा है ,
दिल और आँखों का जुड़ाव ,
दिल जरा दर्द में हो तो ,
आँखे खो देती है सब कुछ अपना,
बिन बुलाए बस स्पर्श कर रूह को छू जाती है!

मैंने देखा है,
दिल और दिमाग का जुड़ाव,
दिल बेचैन होता है ,
दिमाग अपना संतुलन खो देता है,
स्पर्श चाहता है ,शीतलता चाहता है ,
फिर आंखे अपने को खोकर स्पर्श कर जाती है!

मैंने देखा है,
अनगिनत बार दिल ,दिमाग और आंखों को,
व्यवहार बदल देती है ,समय शिथिल कर देती है,
कोई एक भी परेशान हो रंग बदल देती है आंखे,
झील बन जाती है मानों ,न लुढ़कना चाहती है ,
न सूखना चाहती है ,न कहना चाहती है कुछ ,
बस शांत हो कर ,दिल को समझाना चाहती है!

महिमा सिंह©

Friday, December 9, 2022

क़िरदार

 
क़िरदार

किरदार है पूरी जिंदगी हमारी,
किसी के लिए अच्छे किसी के लिए बुरे,
कहीं कमजोर पड़ जाते है, कहीं पत्थर हो जाते,
अविरल है चलते रहना ,भाव यही है जीवन का!

किरदार निभानें आये है ,अपने ही व्यवहारों से,
कहीं हमें कर्तव्य जोड़ता ,कहीं हमें किरदार जोड़ता
कहीं हमारा होना है,कहीं न होकर भी होना है,
कहीं ठहरती याद रहे हम,कहीं याद में मुस्कान बने!

किरदार में अपने सरल रहे,कहीं सहजता पड़ी भारी
एक आशा का दीप बनी,कहीं लौ सी जली गयी,
कहीं हमारा होना काफी,कहीं हमारा सब होना कम
जीवन ही किरदार का क्रम है,कहीं रहे अविरल धारा,कहीं रहे बस वक्त तकाज़ा!

जीवन रण में भूल गए सब,क़िरदार बड़ा हर बात से
मृदुल वाणी और स्नेह वचन है जीवन का आधार,
आधार विस्मृत हो जाना ,मानो माँ का आँचल छूटा
क़िरदार है यह जीवन अपना, मानव भाव है सर्वस्व,
क़िरदार हमेशा स्नेहिल रखना,जीवन का
अंत सत्य है।

महिमा सिंह©
10 dec.2022

Thursday, December 1, 2022

तुम खुद में सम्पूर्ण हो!

तुम्हारे अंदर बैठा है एक फ़रिश्ता,
जिसमें समंदर की तरह गहराई है,
उसके हलचलों में तूफान है,
तुम्हारे अंदर अनगिनत रहस्य है,
तुम्हारी काया में अनगिनत ,
मोती है ,संसाधन है,वैद्य है!

तुम्हारे अंदर बैठा है एक फ़रिश्ता,
जितना बाहर ढूंढोगे उतने ही लहरें पाओगे,
गोताखोर बनों अपने काया का,
उतरों तुम अपने अंदर ,पाओगे
असीम शांति, कण-कण जोड़ोगे
प्रकृति से खुद को !

तुम्हारे अंदर बैठा है एक फ़रिश्ता,
बस हमेशा उसे जीवंत बनाना,
समंदर जीवंत है क्योंकि उसमें है
अनगिनत जीवन ,वह रहस्य है,
तुम खुद एक रहस्य हो सामर्थ्य का,
सुकून का,भाव का ,तुम हो यदि
बस इस पल में जो अभी चल रहा!
Mahima©
1 Dec.2022

There is an angel sitting inside you,
Which is as deep as the ocean,
There is a storm in his movements,
There are many secrets inside you,
Countless in your body,
It is a pearl, it is a resource, it is a doctor!

There is an angel sitting inside you,
The more you search outside, the more waves you will find.
Be a diver of your body,
go inside you will find
infinite peace, will add particle by particle
Nature itself!

There is an angel sitting inside you,
just always make it alive,
the sea is alive because it has
Countless lives, that's the secret,
You yourself are a mystery of strength,
of peace, of feeling, if you are
Just what's going on right now in this moment!

Tuesday, November 29, 2022

स्त्रीत्व

स्त्रीत्व -वह भाव ,वह अहसास है जो आपको आंतरिक तौर से,भीतर से  खूबसूरत बनाता है।

स्त्रीत्व से परिपूर्ण स्त्री,
चाहती है केवल सम्मान,
अपने  सर्वस्व समर्पण ,
के बाद केवल सम्मान!

स्वतन्त्रता, समानता ये
सारी लड़ाइयां जुड़ी है,
मात्र उसके सम्मान से !

स्त्रीत्व से परिपूर्ण का अर्थ
गहरा है बहुत गहरा है,
जिसे समझना होगा चाहे
स्त्री हो या पुरुष या समाज
तभी इस संसार का संतुलन,
संभव हो पाएगा।
Femininity - that feeling, feeling that
 makes you beautiful from within.

feminine woman,
I just want respect
surrender your all,
Only respect after!

freedom, equality
All battles are connected
Just out of respect for him!

Meaning of Feminine
deep, very deep,
which has to be understood
woman or man or society
Only then the balance of this world,
Will be possible.



Tuesday, November 22, 2022

मेरी भावनाएं-4

मेरी भावनाएं-4

जहाँ तक मेरी समझ में आता है तो किसी व्यक्ति की सफलता, उसका कार्य,उसे क्या करना है यहाँतक कि पूरा जीवन केवल हमारे  निर्णयन
क्षमता का परिणाम होता है।
        बस इस बात को समझना ज्यादा जरूरी हो जाता है कि आप उस निर्णय को समय रहते ले रहे है या समय के अनुसार आपका निर्णय कितना सही है क्योंकि आज आप जो कर रहे ,जो सीख रहे ,पढ़ रहे यही सब हमारा कल निर्धारित करने का संकेत है जैसा कि हमारे "मिशाइल मैन जी " का भी मानना है।
        कई बार हमें ऐसे निर्णय लेने पड़ते है जो आपको आप से जोड़ने ,अपने क्षमता को आंकने ,उसको और अधिक प्रगति करने के लिए लेते है जिसके कारण आपको कहीं न कहीं लोंगो के कुछ उम्मीद भी तोड़ने पड़ते है या यों कहूँ तो टूट जाते है।
      हम अपने सपने को पूरा करने के लिए जब घर अपने क्षेत्र से दूर होते है तो तकलीफ़ आपके साथ ,आपके परिवार, दोस्त सब को होता है क्योंकि हम भावनात्मक रूप से जुड़े है।हम अपने लिए ,परिवार,समाज और राष्ट्र के लिए योगदान देने हेतु एक प्रगतिशील मानव बनने की कोशिश करते है जिसमें बहुत कुछ छूटता है पीछे ,जिसमें सिर्फ आपके लोग नहीं छूटते बस भावनात्मकता और अपने कर्म के बीच आपके कर्म चुनना होता है।
           यही प्रगतिशील विचार ही आज मानव के विकास का सबसे अहम हिस्सा रहा है।मैंने अपने आपको देखा है मैने जितनी बार खुद को ठहराव दिया,या भावनात्मक बंधनो में बाधा है मैंने प्रगति के बजाय अपना अस्तित्व,अपना कर्म ,अपना व्यवहार सब में धूल जमा हुआ पाया ।
"बहते रहना ही नदी की पवित्रता और स्वच्छता का मुख्य कारण है ।"  हिमालय से निकली गंगा ,अनगिनत रास्ते तय करते हुए लगातार बहती आ रही है हा हिमालय क्षेत्र में अनगिनत औषधियों के मिलने और सम्पर्क से आज भी उसकी स्वच्छता बरकरार रही है । इसी तरह अनुशासन,लगन,योग ,आत्मप्रेरणा सब मनुष्य के जीवन में औषधि है ,जो आपको कर्म पथ पर अग्रसर बनाते है।
            अपने अंदर कोमलता, पवित्रता, उदारता ,कर्म निष्ठा बनाये रखना है तो निरंतर बहते रहने की आवश्यकता है,ठहराव और बंधन कहीं न कहीं हमारे व्यक्तित्व को धूमिल करता है। प्रकृति आपकी दुनियां है यह आपको प्यार करती है, सहयोग करती है आपका शरीर ही युद्धक्षेत्र है जिसमें अनगिनत भावनाओं, विचारों से आपको लड़ कर सही निर्णय लेना होता है।
     यह मेरे स्वयं के विचार है।
आगे सफर जारी रहेगा।
राधे राधे✍️
महिमा सिंह©

Sunday, November 20, 2022

मेरी भावनाएं-3

 
मेरी भवनाएं-3

   "मुझे दिन उजालें में तो तोड़ सकते हो ,मग़र
तुम्हे मालूम नहीं ,हर रात मेरा ख़ुदा मुझे जोड़ जाता है ,
जो हर सुबह मुझे सहलां कर जगा जाता है!"

       तमाम लोग क्या सोचते होंगे किसी को नहीं पता ,मुझे याद है कि मैं एक बार बोली अपनी माँ से की मेरे दिमाग में ये सारी बातें चलती है जब भी अकेले बैठती हूं,तब उन्होंने कहां की हम लोग भी सोचा करते थे ,कभी बोल नहीं पाए ,कुछ कर नहीं पाए,फिर सामाजिक जीवन में इतनी व्यस्तता बढ़ गयी,पढ़ाई, लिखाई, शिक्षण कार्य कि सब पीछे छूट गया ।
       मैं अपनी सोच अपने पास रखकर सब खत्म नहीं होने देना चाहती हूं ,इसलिए मैं लिखती हूं  ताकि शायद कुछ बदलाव दे सकूँ ,इस बात में कोई शक नहीं है कि इसकी हिम्मत भी मेरे परिवार के भरोसे और सीख की ही देन है ।

मुझे महसूस होता है मेरे अंदर की निर्मलता ,सोच जो मुझे बहुत ही सकारात्मक दृष्टिकोण से भरता रहता है, जब से सारी बातें समझ आने लगी महसूस होता है कि आख़िर ये प्रकृति को महसूस कर पाना,संवेदनाओं को महससू करना, मेरा आत्मबल मुझे क्यों अलग बनाता है।
            यह ऐसा है क्योंकि इसके पीछे निर्मलता ही है मेरे अंदर जो कुछ भी है वह एक परिणाम है मेरे माता -पिता की साधना ,आध्यात्मिकता,धैर्य ,संतोष मैंने कभी उन्हें इस बात से परेशान होते नहीं देखा कि सामने वाले के पास क्या है और उनके पास क्या नही है।
       उन्होंने हमारे जन्म से लेकर सपनों में हमेशा शिक्षा, एक व्यवस्थित जीवन ,स्वतन्त्र माहौल के अलावा कु छ उम्मीद ही नहीं कि चाहे उनके पास था या नहीं या अभी है या नहीं। उनके अंदर की निर्मलता ही हमारी सोच का परिणाम है। मेरी बहन की सोच उसकी स्वतन्त्रता,  जो मुझे प्रेरणा देता है कि उसने अब तक सिर्फ वह चुना है जिसे वह मानती है कि इससे किसी का दिल नहीं दुःखेगा, उसका प्रेम ,उसकी जिम्मेदारी सब उसे लोगों से बहुत अलग बनाता है वह खुद से ज्यादा दूसरों के लिए जीती है ,ये सब सोच एक सकारात्मकता का प्रतीक है जो कहिं न कहीं परिवार का आध्यात्मिक झुकाव मानो या एक अनन्त सकारात्मकता का स्रोत जिसे ईश्वर मान लो या कोई ऊर्जा जिसका सकारात्म जुड़ाव है । आध्यत्मिकता और अंधभक्ति में कम फर्क है जो बहुत फर्क डाल देता है आपकी सोच ,समझ ,खान -पान पर।
         मेरे लिखने से मेरे काम में व्यवधान नहीं होता है क्योंकि मैं अपने को लिखती हूं मेरा कर्म मेरा है उस पर मेरा ध्यान हमेशा रहता है!
     एक चीज लोंगो से सीखा है
"जब आपके पास कुछ नहीं है तब भी आप संतुष्ट हो ,तब लोगों को लगता है किस्मत खराब है,
जब आपके पास आवश्यकता भर है एक अच्छी स्थिति है और आप तब भी शांत हो ,परे हो दिखावे से ,तब लोग कहते है कि अरे किस्मत साथ दे गई !"
       कर्म को किस्मत का नाम देना ,धैर्य को किस्मत का नाम देना क्या सही है?
किस्मत को सकारात्मकता,ऊर्जा से भी देखा जा सकता है लेकिन आवश्यक है कि अपने अंदर की निर्मलता को पहचाने हम सबसे पहले,अच्छा सोचे लोगों के लिए चाहे वह कोई भी हो,आप खुद को ही हमेशा शांत पाओगे ,यही है सोच का जादू!

   आगे सफर जारी रहेगा .....
राधे राधे✍️
महिमा सिंह©
          

22 may CA