Saturday, January 21, 2023

गहराईयां

दिखने से ज्यादा छिपने में हूं,
बोलने से ज्यादा खामोशी में हूं,
शब्दों से ज्यादा सोच में हूं ,
लिखने से ज्यादा हकीकत में हूं,
शब्दों से ज्यादा अर्थो में हूं,
बयाँ करने से ज्यादा स्पर्श में हूं,
बाहर से ज्यादा भीतर में हूं,
लोगों से ज्यादा खुद में हूं,
गुस्से से ज्यादा धैर्य में हूं,
कोमलता से ज्यादा आंतरिक
मजबूती में हूं,
रोने से ज्यादा भावनाओं में हूं,
दिल से ज्यादा दिमाग में हूं ,
स्त्री से ज्यादा स्त्रीत्व में हूं,
बाहर से ज्यादा भीतर में हूं!
महिमा यथार्थ©

Tuesday, January 17, 2023

जीवन


जीवन मिलना एक खूबसूरत एहसास है,
जिंदगी देना एक कर्तव्य भी है और प्रेम भी,
एक जीवन के अनगिनत पक्ष है,प्रत्येक पक्ष
को मैं जीना चाहती हूं,हर क्षण में जीवंतता है!

हर पक्ष मैं जीना चाहती हूं,अनगिनत पक्ष में,
 कुछ भी थोड़ा या समझौते से परिपूर्ण जीवन
नही चाहती है,हार ,जीत ,सम्मान देना ,सम्मान लेना,
आलोचना ,प्रतिक्रिया,प्रेम देना,सुधार करते रहना !

अनगिनत जब तक प्राण है मैं बस जीना चाहती हूं,
हर एक क्षण में आनन्द है एक भाव है, एहसास है,
जीवन खूबसूरत है बस कभी भरोसा नहीं तोड़ना ,
क्योंकि भरोसा ईश्वर की तरह होता है,हमारा विश्वास
ही हमारे अंदर ईश्वर की उपस्थिति है!

अपमान करना किसी का आपके खुद को
कष्ट पाने के मार्ग प्रशस्त करता है,
हर क्षण ऐसे जीना है कि साथ रहने और जीने वाले,
ताउम्र उन क्षणों को सोच मुस्कुरायें, न कि शोक या मौन,
अति का कुछ भी अच्छा नही होता सिवाय
विश्वास, प्रेम,समर्पण,सम्मान के यदि कद्र की जाय!
Mahima Singh©

समय शून्य है और मैं शून्य होती जा रही हूं

Friday, December 30, 2022

मेरे अंदर का स्त्रीत्व

मेरे शब्दों में गहराई का होना मेरा परिचय नहीं,
मेरे अंतर्मन की गहरी समझ का परिचायक है,
मेरे शब्दों का मेरे अंतर्मन से जुड़ाव होना ,
मेरे आत्मीयता का परिचायक है,मेरा व्यक्तित्व नही,
मेरा बाहरी रूप से शांत होना मेरे अंतर्मन की शांति है,
मेरा सरल और सहज व्यक्तित्व होना ,मेरे अंतर्मन की शुद्धि का प्रतीक है,जो मुझे प्रकृति से जोड़ता है,
मेरे मन की कठोरता परिचायक है कि शून्य हो जाना
प्रस्तर होने का स्वभाव है,चाहे वह पंचतत्व शरीर हो या हो पर्वत और पहाड़ , मेरा बिल्कुल बिंदुवत बातचीत
मेरे  अंतर्मन के यथार्थता का परिचायक है,
मेरे शब्दों में गहराई होना मेरा परिचायक नहीं है !

मेरा अबोध बालपन में जीना ही मेरा परिचय है,
मेरा ममत्व से परिपूर्ण होना ही मेरा परिचायक है,
मेरे बहते अश्रु ही मेरे मनुष्य होने का परिचायक है,
मेरा बच्चा बने रहना ही मेरे अंतर्मन की शुद्धि का परिचायक है,मेरा मुझमे बने रहना ही मेरा परिचय है,
मेरे शब्दों में गहराई का होना मेरा परिचायक नहीं है,
मेरा गम्भीर होना मेरा परिचायक नहीं मेरा कर्तव्यबोध है,
मेरा मुझमें बचे रहना ईश्वरीय रचना का परिचायक है !
महिमा यथार्थ©

Sunday, December 18, 2022

भावनायें





मैंने देखा है ,
दिल और आँखों का जुड़ाव ,
दिल जरा दर्द में हो तो ,
आँखे खो देती है सब कुछ अपना,
बिन बुलाए बस स्पर्श कर रूह को छू जाती है!

मैंने देखा है,
दिल और दिमाग का जुड़ाव,
दिल बेचैन होता है ,
दिमाग अपना संतुलन खो देता है,
स्पर्श चाहता है ,शीतलता चाहता है ,
फिर आंखे अपने को खोकर स्पर्श कर जाती है!

मैंने देखा है,
अनगिनत बार दिल ,दिमाग और आंखों को,
व्यवहार बदल देती है ,समय शिथिल कर देती है,
कोई एक भी परेशान हो रंग बदल देती है आंखे,
झील बन जाती है मानों ,न लुढ़कना चाहती है ,
न सूखना चाहती है ,न कहना चाहती है कुछ ,
बस शांत हो कर ,दिल को समझाना चाहती है!

महिमा सिंह©

Friday, December 9, 2022

क़िरदार

 
क़िरदार

किरदार है पूरी जिंदगी हमारी,
किसी के लिए अच्छे किसी के लिए बुरे,
कहीं कमजोर पड़ जाते है, कहीं पत्थर हो जाते,
अविरल है चलते रहना ,भाव यही है जीवन का!

किरदार निभानें आये है ,अपने ही व्यवहारों से,
कहीं हमें कर्तव्य जोड़ता ,कहीं हमें किरदार जोड़ता
कहीं हमारा होना है,कहीं न होकर भी होना है,
कहीं ठहरती याद रहे हम,कहीं याद में मुस्कान बने!

किरदार में अपने सरल रहे,कहीं सहजता पड़ी भारी
एक आशा का दीप बनी,कहीं लौ सी जली गयी,
कहीं हमारा होना काफी,कहीं हमारा सब होना कम
जीवन ही किरदार का क्रम है,कहीं रहे अविरल धारा,कहीं रहे बस वक्त तकाज़ा!

जीवन रण में भूल गए सब,क़िरदार बड़ा हर बात से
मृदुल वाणी और स्नेह वचन है जीवन का आधार,
आधार विस्मृत हो जाना ,मानो माँ का आँचल छूटा
क़िरदार है यह जीवन अपना, मानव भाव है सर्वस्व,
क़िरदार हमेशा स्नेहिल रखना,जीवन का
अंत सत्य है।

महिमा सिंह©
10 dec.2022

22 may CA