Friday, July 28, 2023

तथाकथित समाज

मैंने जानबूझकर वक्त दिया खुद को ,ताकि मैं जान सकूँ कि क्या चाहते है लोग ,समाज ,परिवार,दोस्त ....अन्ततः पाया यही है कि आप अगर पूछे जाते हो,प्यार किए जाते हो,सम्मानित किए जाते हो,गलतियां आपकी भुला दी जाती है जो कि यह भी समाज ही निर्धारित करता है कि क्या सही है क्या गलत.... तो बस आपकी आर्थिकी का जरिया क्या है इससे,आप की आय कितनी है...सम्पत्ति कितनी है...खाशकर लड़को के लिए तो यह और दुबिधा से भरा है ,यह उन्हें समाज में खड़े होने के लिए अतिआवश्यक है...
               यह सारी चीजों में लड़कियों का यह पक्ष इसलिए आता है कि एक तो वह खुद चाहती हो यह मुकाम पाना, अपना कुछ अपने बल बूते करना, बहुतायत यह समाज में एक वजूद बनाने के लिए करती है ताकि उन्हें मजबूरन दब कर,मजबूरन ,रिश्ते को ढोना न पड़े वह जी सके एक सामान्य जीवन अपने आस -पास समाज में ,हमसफ़र के साथ ,जिम्मेदारी की तरह उन्हें न समझा जाए इसलिए करती है ....
                        नहीं तो शादी तो हो ही जाती है लड़कियों की दहेज देकर,सुंदरता देख कर,घरेलू गुण देखकर ,रसोई घर की कारीगरी देखकर,नौकरी देखकर....
       आपका दिल, आपका नजरिया ,आपका ज्ञान,आपकी काबिलियत, आपकी नियत,आपका चरित्र, आपका स्वभाव कितना ही बेहतरीन क्यों न हो ,
यह सब बाद की बातें है ...जब बात रिश्ते बनाने को होते है ......
      लेकिन अगर सिर्फ बात करनी हो,किसी को प्रभावित करनी हो,किसी से किसी भी तरह की स्वार्थसिद्धि करनी हो तो यह सब प्रथम बन जाता है हमारे समाज ,परिवार व अन्य के लिए...
      यहीं दोगलापन है समाज का ....
    इसलिए आप को सब कुछ समन्वय करके चलना पड़ता है ....
      समाज का डर दिखाया भी जाता है ,समाज ही आपके लिए गड्ढे भी बनाता है ,दरिया भी बनाता है,परतंत्रता भी देता है ....आजादी तो बस कागजों में है ..यदि चाहिए तो लड़ो कानून से ,समाज से तब आप विरोधी और विद्रोही भी हो जाएंगे....
   बधाई हो आप तथाकथित समाज के दोगलेपन का शिकार है...
   आप बस स्वयं से मुक्ति ले सकते है ,अतः आनन्द में रहिए ...कोई आप को छोड़ने वाला नहीं है .....
 
"जीवन पाकर जीवन में,
जीवंत रहो तुम हर क्षण ,
लोग जी रहे है मृत जीवन,
तुम जीवन में जीवित रहते ,
मत जीना एक मृत जीवन!"

Thursday, June 22, 2023

"हमसफ़र"


सभी स्त्रियां नहीं ढूंढती है,
सुंदरता,धन -दौलत,पद, प्रतिष्ठा ,
मर्द ,प्रेमी ,पति !

कुछ ढूंढती है एक  मात्र दोस्त,
उसके जीवन का बेहतरीन मर्द,
जिसमें वह देखती है ,
पिता की परछाई ,उनका सानिध्य
भाई का प्यार ,उसकी नोक -झोंक
माँ सा प्यार , भाई-बहन सा साथ !

एक व्यक्ति जो बस जब साथ हो ,
वह आंगन छोड़  चुकी सारा बाबुल
ढूंढती है उसमें बस,
जो परखता न हो उसे ,वह समझ
पाए उसे समाज के रूढियों से परे !

मर्द और औरत की भिन्नता से परे,
वह उसे समझे अपना हमसफ़र !

वैसा ही जैसा कि कुछ पुरुष ,
केवल नहीं चाहते एक सुंदर स्त्री
वह चाहते है माँ सा प्यार,
पिता सा संबल ,खामोश सा प्यार
बहन जैसी सहायक ,
दोस्तों  जैसा कोई व्यक्ति,
जो उन्हें परखता न हो,
उनकी नादानियों में साथ देता हो ,
एक - दूसरे का राज रख सके ,
खुल कर हँस सकता हो ,
चर्चा कर सकता हो ,
सुन सकता हो ,
समझ सकता हो ......
महिमा यथार्थ©

Sunday, June 11, 2023

धैर्य धारण करना लेकिन,
कह कर इसे जताना क्यों,
धारण है तो आवश्यकता क्या,
प्रमाणिकता देना,
धैर्य करो धारण तुम ,केवल
खुद को मानसिक शांति के लिए ,
जो होना है जब होना है होकर ही रहना है,
कर्म प्रधान है इस जीवन का,
करो और फिर रहो मस्त!

क्षमाशील बनो लेकिन,
खुद को दोबारा धक्का  देना क्यों,
क्षमा करो या माँगो लेकिन,केवल
खुद की शांति के लिए,
कह कर या कर के इसे जताना क्या ,
मत दौड़ो तुम महानता के दौड़ में,
हर किसी को समझ आओ,
हर किसी के लिए सही ही रहो,
जरूरी तो नहीं!

हर बात की पुष्टि देना,
हर बात की व्याख्या करना,
दिखाता है बस तुम्हारा ही कुछ छिपाना,
मत करो तुम किसी की पुष्टि,
जो जैसा है रहने दो,
जो जैसा है बोलो तुम,
खुद को अपनी नजरों में बस
कभी न तुम गिरने देना!
महिमा यथार्थ©




Friday, May 26, 2023

क्यों नहीं

चलो आज कुछ बात कर ले,
मेरे हिस्से में इंतजार क्यों है,
मेरे हिस्से में प्राथमिकता क्यों है,
मेरे हिस्से में पहल क्यों है,
मेरी हिस्से में समझदारी क्यों है,
मेरे हिस्से में नाराजगी भी तुमसे ही
मेरे हिस्से में बातों का ज़रिया भी तू है,
मेरे किस्से के हर हिस्से में तू है,
क्यों है तुम पर जिम्मेदारी और मर्यादा का दायित्व,
क्यों नही है अधिकार तुम्हें अपने जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से को चुनने का,
क्यों तुम्हारा चुनाव हमेशा ग़लत ही लगता है,
क्यों नहीं दिया जाना चाहिए एक मौका तुम्हारे चुनाव को,
क्यों प्राथमिकता दे दी जाती है समाज को बजाय तुम्हारे,
ऐसा बोलती रहूं तो बस यह मेरा हिस्सा ही  है !


क्यों है तुम्हारे हिस्से में जिम्मेदारी सा एहसास,
क्यों है तुम्हारे हिस्से में लोगों के साथ मेरी प्राथमिकता,
क्यों है तुम्हारे हिस्से में मेरे सम्मान की प्राथमिकता,
क्यों  है तुम्हारे हिस्से हर बात की जिम्मेदारी रखना
और अपने को बस कठोर बनाए रखना,
क्यों है तुम्हारे हिस्से जिम्मेदारी के बदले नाराजगी और रूखा सा व्यवहार,
क्यों है सिर्फ तुझ पर सारे समाज की  कहीं अनकही जिम्मेदारी का बोझ,
क्यों ढाला गया है तुझे कठोर साँचे में,
नहीं हो तुम कठोर,
क्यों नही स्वीकार की जाती है तुम्हारे चुनाव को उसी अधिकार से जैसे कोई और चुना जाता है उनके द्वारा,
क्यों नहीं समझने की कोशिश की जाती है,
तुम हो पात्र बस प्यार,सम्मान और कद्र के
अगर तुम सच में ऐसे हो!

क्यों नही समझने ,स्वीकारने ,मौका देने की कोशिश  की जाती है?यथार्थ!

Monday, March 27, 2023

प्रतीक्षा

कुछ वाक़या जीवन को सीख देने के साथ बहुत आहत कर जाती है,पता नहीं क्यों लेकिन भावों को समझने और उसकी गहराई बहुत ही स्तब्ध कर जाती है।
   एकाकीपन हमें लगता है युवाओं में अत्यधिक है लेकिन इससे कहीं ज्यादा मैंने पाया कि एकाकीपन वृद्ध जनों में बहुत ज्यादा है,जो बिल्कुल अनकहा, अनसमझा है हम एक वक्त के बाद भूल जाते है कि हमारे माता-पिता को  हमारी सबसे ज्यादा जरूरत तब सबसे ज्यादा होती है जब हम अपने जिंदगी के अहम हिस्से में जी रहे होते है जब हमें लगता है कि सब कुछ यही है ऐसा ही रहेगा यही हमारी दुनियां है हम उस दुनियां में उनको भूल चुके होते है,शहरों की सुविधाएं, विकास लुभावनी तो लगती है लेकिन यहाँ पड़ोस में भी खबर नहीं होती कौन है कौन नही,कई मकानों में माँ अकेले रह रही,पिता अकेले रह रहे,कहीं दोनों अकेले रह रहे,हम उन्हें सहायकों के भरोसे छोड़,दूसरे देशों में रह रहे है,बयां नहीं कर सकती हूं मैं कि यह किस हद तक का एकाकीपन बढ़ रहा समाज में ,जो लगातार  डिप्रेशन, हार्ट अटैक ,मानसिक पीड़ा दे रहा है ।
     जानती हूं कि यही सवाल आएगा कि क्या किया जा सकता है जीवन को चलाने के लिए,आर्थिक अर्जन के लिए करना पड़ेगा न ,धीरे-धीरे समझ आ रहा है मुझे कि हम इतने अर्जन के बाद भी खाली ही जाते है सब को पता है लेकिन वही है न अपनी पीड़ा हमें अपनी लगती है किसी और की पीड़ा जब तक समझ आती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.....

   शब्द नहीं है मेरे पास,
उन भावों की अभिव्यक्ति करूँ,
जीवन चक्र के उन भावों का,
कैसे करूँ मैं अभिव्यक्ति!
    
          नित जीवन के उन क्षण का,
          जो देता पीर,अनकहे भावों में,
          विरह वेदना के उन भावों का,
          जो मन के अन्तस् को भर जाता!

जीवन का सम्पूर्ण त्याग,
जब खत्म हो एकाकीपन में,
सब धरे रह गया इसी धरा पर!

        नहीं है कोई शब्द धरा में,
        जो व्यक्त करें उन भावों को,
        क्षुब्ध हो गया है मन मेरा!

हम दूर हो गए इतना अपनों से,
कर पाएं न जब अंतिम दर्शन,
जीवन दाता हो जो अपने!

      कलेजा छलनी तो हुआ होगा,
       प्रश्न तुम्हें भी घेरे होंगे,
      इतनी दूर निकल आए क्यों!

जीवन के अंतिम क्षण तक,
ललचाई सी आँखों में,
एक प्रतीक्षा देखी है!

महिमा यथार्थ©







Tuesday, March 14, 2023

स्पर्श

शीतलता है स्पर्श में,
भावनाएं है स्पर्श में,
सुकून है स्पर्श में!

हवा की छुवन ,
नहीं छूती है ,
केवल
शरीर ,
छू जाती है मन,
साथ होने का आभास दे जाती है,
हवाएं  शीतल कर जाती है रूह ,
उदाहरण भी है आंधी कि
तीव्रता ,आततायी ,अति
घातक है !


खिलते फूल नहीं है
केवल सुंदर,
वह है रंग ,
अपने स्वभाविकता का,
अपनी शुद्धता का,
प्रमाण है गुणवत्ता का,
नहीं करती है केवल ,
आंखें उनका दीदार,
उसका स्पर्श आभास देता है,
कोमल मन का,
वृद्धि करते हम देख पाते है,
सीखते है धैर्य को,
उसके प्रत्येक अंग के संयोजन का ,
देता है उत्तम उदाहरण!

चहचहाना केवल उनकी आवाज नहीं है,
है वह मन की चंचलता का प्रतीक ,
उनकी खुशियों का प्रतीक ,
उनके प्रत्येक भावनाओं
की अभिव्यक्ति,
उदाहरण है कि सुनो
तुम लोगों के कहे अनकहे
जज़्बात, आवाज ,
ईश्वर द्वारा भेजे गए ये
जीवन्त उदाहरण है ,
जो सीखते रहने,
बदलाव करते रहने,
के जीवन्त प्रतीक है!

पृथ्वी पर उगी घासें,
स्पर्श करते मेरे पावँ
सारे ताप ,
सारी जलन ,
खींच लेती है,
उसकी कोमलता
महसूस होती है,
मन को,
मस्तिष्क को,
बदल देते है हमारे
उद्दवेलित मन को,
आहिस्ता शांत कर जाते है,
ये अनगिनत स्पर्श !

महिमा यथार्थ©

मेरे पास एक दीप है!

मेरे पास एक दीप है,
जिसका उजाला मेरे अंतर्मन तक पहुँचा,
वह खुद प्रकाशित है और उसके अंतस में खोज है!

मेरे पास एक जलता दीप है,
जिसकी लौ प्रकाशित है,
उसकी प्रकाश में ताप है,
जिसकी छाया में शीतलता है!

आँधियों में उसकी लौ को मुझे,
आँचल देना है,उसकी लौ मुझे
गर्मी दे रही है मै खुश हूं!

मेरे पास एक जलता दीप है,
जो मेरे अंधेरी रातों का हमसफ़र होगा,
जिसकी लौ हवा में मुझे बेचैन करती है,
जिसकी शांती मुझे बेचैन करती है!

मेरे पास एक जलता दीप है,
जिससे गर्माहट तो है लेकिन यह,
मेरे आत्मा की तहों तक पहुँच,
सुलगा रही है मुझे आहिस्ता से !

मेरे पास एक जलता दीप है,
जो अल्हड़,बेबाक़, चट्टान सा जल रहा है,
उसकी बाती ही उसे जला कर प्रकाशित कर रही है,
वह खोजी है एक शीतलता का,सुकून का ,
उसे एहसास है उस तेल का जो उसे प्रकाशित कर रही है!

मेरे पास एक जलता दीप है,
जिसके कण-कण को समझना है ,
जैसे किसी कोरे किताब का लेखक
एक -एक वर्ण महसूस करता है,
पिरोता है शब्दों को और करता है
जीवन्त एक किताब को !
महिमा यथार्थ©

22 may CA