Tuesday, February 14, 2023

मेरी भावनायें और अनुभव-6









मेरी भावनाएं एवं अनुभव -5

रिश्ता ,एक जन्म से मिलता है जिसमें हमें स्वीकार्यता ,कर्तव्य ,सम्मान,स्वतंत्रता ,जिम्मेदारी, पारिवारिक सम्मान सब से जन्म से ही जुड़ाव होता है।दूसरा हम स्वयं स्वीकार करते है अपने दिल से ,अनुभव से ,भावनाओं से अपने स्वयं की इच्छाओं से जिसका भी निर्वाह हमें करना चाहिए अपनी पूरी ईमानदारी, दायित्व और जिम्मेदारी से ।
       भावनात्मक रिश्ते में प्रेम जैसा कुछ नहीं मेरे अपने विचार और अनुभव से ,जिस रिश्ते में सम्मान है,स्वतंत्रता है,धैर्य है ,समझने की कोशिश है एक दूसरे के विचार,व्यवहार,आदत की,एक दूसरे को धैर्य पूर्वक सुनने की इच्छाशक्ति है,एक दूसरे के व्यक्तिगत समय ,व्यवहार ,स्वतंत्रता की कद्र है,एक खुलापन है लैंगिक रूढ़ियों के विरुद्ध, आपकी अपनी एक सोच और अच्छे विचार है ,
आकर्षण के साथ -साथ ठहराव है ,जीवन जीने की प्रेरणा है,कुछ समझने और व्यवस्थित करने की इच्छाशक्ति है , समाज के प्रति एक जिम्मेदारी है ,रूढ़ियों के प्रति विरोध के साथ ,समभाव की भावना है ,एक दूसरे का ख़याल है ,शब्दों ,लहजों और व्यवहार में एक स्थिरता और सम्मान है मेरा अनुभव यही है कि प्रेम इससे ज्यादा कुछ और नहीं है।
                   वर्तमान समय का परिदृश्य कुछ अलग ही चल रहा है लोगों एक दूसरे को समय और साथ जैसे अनमोल उपहार के बजाय महंगें उपहार,ब्रैंड, एक जोड़ी का दूसरे से प्रतिस्पर्धा उपहार,दिखावपन, शारीरिक बनावट साथ ही मानसिक रूप से बाहरी सुंदरता के प्रति रुझान इस कदर बढ़ गया है कि लड़के -लड़किया सब एक मानसिक तनाव और कुंठा से ग्रस्त होते जा रहे है।
             मेरे शब्द है-"सबको अच्छा दिखना है ,अच्छा बनना नहीं है ।" बाहरी आकर्षण इस कदर हावी हो गया है कि युवा अपने को कमतर समझने लगे है आंतरिक सुंदरता,वैचारिक खुलापन ,मानसिक खुलापन पर ध्यान ही नहीं दे रहे है।
      जो लोग सही ढंग से एक अच्छे परिवार ,व्यक्ति से जुड़े हुए है उनके परिवार में लोग जातिगत बन्धन ,रीति-रिवाज ,रूढ़ियों में इस कदर फसे हुए है कि खुलेपन से दिल से स्वीकृति नही देते है ।मेरा विचार है कि यदि आप व्यक्तिगत रूप से अमूक व्यक्ति ,परिवार के व्यवहार ,आदतों से परिचित है यदि आपको लगता है कि आपके बच्चें द्वारा एक गलत निर्णय किया जा रहा है जो भविष्य में उसके लिए सही नहीं होगा तब अस्वीकृति का कुछ अर्थ निकलता है किंतु यदि आप व्यक्तिगत तौर पर नहीं जानते है तो उन्हें जानने ,समझने का मौका लीजिये केवल इस वजह से उनके रिश्ते को अस्वीकार करना कि वह अलग जाति से है ,शारिरिक रूप,रंग में अंतर है खान -पान में अंतर है यह एक शिक्षित समाज और परिवार की मानसिक संकीर्णता के अलावा और कुछ नहीं है।
   मेरे अपने व्यक्तिगत विचार है ।
महिमा यथार्थ©






Saturday, January 21, 2023

गहराईयां

दिखने से ज्यादा छिपने में हूं,
बोलने से ज्यादा खामोशी में हूं,
शब्दों से ज्यादा सोच में हूं ,
लिखने से ज्यादा हकीकत में हूं,
शब्दों से ज्यादा अर्थो में हूं,
बयाँ करने से ज्यादा स्पर्श में हूं,
बाहर से ज्यादा भीतर में हूं,
लोगों से ज्यादा खुद में हूं,
गुस्से से ज्यादा धैर्य में हूं,
कोमलता से ज्यादा आंतरिक
मजबूती में हूं,
रोने से ज्यादा भावनाओं में हूं,
दिल से ज्यादा दिमाग में हूं ,
स्त्री से ज्यादा स्त्रीत्व में हूं,
बाहर से ज्यादा भीतर में हूं!
महिमा यथार्थ©

Tuesday, January 17, 2023

जीवन


जीवन मिलना एक खूबसूरत एहसास है,
जिंदगी देना एक कर्तव्य भी है और प्रेम भी,
एक जीवन के अनगिनत पक्ष है,प्रत्येक पक्ष
को मैं जीना चाहती हूं,हर क्षण में जीवंतता है!

हर पक्ष मैं जीना चाहती हूं,अनगिनत पक्ष में,
 कुछ भी थोड़ा या समझौते से परिपूर्ण जीवन
नही चाहती है,हार ,जीत ,सम्मान देना ,सम्मान लेना,
आलोचना ,प्रतिक्रिया,प्रेम देना,सुधार करते रहना !

अनगिनत जब तक प्राण है मैं बस जीना चाहती हूं,
हर एक क्षण में आनन्द है एक भाव है, एहसास है,
जीवन खूबसूरत है बस कभी भरोसा नहीं तोड़ना ,
क्योंकि भरोसा ईश्वर की तरह होता है,हमारा विश्वास
ही हमारे अंदर ईश्वर की उपस्थिति है!

अपमान करना किसी का आपके खुद को
कष्ट पाने के मार्ग प्रशस्त करता है,
हर क्षण ऐसे जीना है कि साथ रहने और जीने वाले,
ताउम्र उन क्षणों को सोच मुस्कुरायें, न कि शोक या मौन,
अति का कुछ भी अच्छा नही होता सिवाय
विश्वास, प्रेम,समर्पण,सम्मान के यदि कद्र की जाय!
Mahima Singh©

समय शून्य है और मैं शून्य होती जा रही हूं

Friday, December 30, 2022

मेरे अंदर का स्त्रीत्व

मेरे शब्दों में गहराई का होना मेरा परिचय नहीं,
मेरे अंतर्मन की गहरी समझ का परिचायक है,
मेरे शब्दों का मेरे अंतर्मन से जुड़ाव होना ,
मेरे आत्मीयता का परिचायक है,मेरा व्यक्तित्व नही,
मेरा बाहरी रूप से शांत होना मेरे अंतर्मन की शांति है,
मेरा सरल और सहज व्यक्तित्व होना ,मेरे अंतर्मन की शुद्धि का प्रतीक है,जो मुझे प्रकृति से जोड़ता है,
मेरे मन की कठोरता परिचायक है कि शून्य हो जाना
प्रस्तर होने का स्वभाव है,चाहे वह पंचतत्व शरीर हो या हो पर्वत और पहाड़ , मेरा बिल्कुल बिंदुवत बातचीत
मेरे  अंतर्मन के यथार्थता का परिचायक है,
मेरे शब्दों में गहराई होना मेरा परिचायक नहीं है !

मेरा अबोध बालपन में जीना ही मेरा परिचय है,
मेरा ममत्व से परिपूर्ण होना ही मेरा परिचायक है,
मेरे बहते अश्रु ही मेरे मनुष्य होने का परिचायक है,
मेरा बच्चा बने रहना ही मेरे अंतर्मन की शुद्धि का परिचायक है,मेरा मुझमे बने रहना ही मेरा परिचय है,
मेरे शब्दों में गहराई का होना मेरा परिचायक नहीं है,
मेरा गम्भीर होना मेरा परिचायक नहीं मेरा कर्तव्यबोध है,
मेरा मुझमें बचे रहना ईश्वरीय रचना का परिचायक है !
महिमा यथार्थ©

Sunday, December 18, 2022

भावनायें





मैंने देखा है ,
दिल और आँखों का जुड़ाव ,
दिल जरा दर्द में हो तो ,
आँखे खो देती है सब कुछ अपना,
बिन बुलाए बस स्पर्श कर रूह को छू जाती है!

मैंने देखा है,
दिल और दिमाग का जुड़ाव,
दिल बेचैन होता है ,
दिमाग अपना संतुलन खो देता है,
स्पर्श चाहता है ,शीतलता चाहता है ,
फिर आंखे अपने को खोकर स्पर्श कर जाती है!

मैंने देखा है,
अनगिनत बार दिल ,दिमाग और आंखों को,
व्यवहार बदल देती है ,समय शिथिल कर देती है,
कोई एक भी परेशान हो रंग बदल देती है आंखे,
झील बन जाती है मानों ,न लुढ़कना चाहती है ,
न सूखना चाहती है ,न कहना चाहती है कुछ ,
बस शांत हो कर ,दिल को समझाना चाहती है!

महिमा सिंह©

22 may CA